सौभाग्य एवं समृद्धि उत्सव
अक्षय तृतीया संपूर्ण मार्गदर्शिका: परशुराम जयंती, स्वर्ण क्रय मुहूर्त और श्री हरि पूजन
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यह पर्व तब मनाया जाता है जब तृतीया तिथि पूर्वाह्न काल में उपस्थित हो।
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वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को 'अक्षय तृतीया' या 'आखा तीज' का पावन पर्व मनाया जाता है। संस्कृत में 'अक्षय' का अर्थ है 'जिसका कभी क्षय या नाश न हो'। मान्यता है कि इस दिन किए गए जप, तप, दान, स्नान और स्वर्ण या रजत की खरीदी का फल अनंत और शाश्वत होता है। यह दिन स्वयंसिद्ध शुभ मुहूर्तों (अबूझ मुहूर्त) में से एक है। इसी दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम का प्राकट्य हुआ था, त्रेतायुग का आरंभ हुआ था और महर्षि वेदव्यास जी ने महाभारत लिखना शुरू किया था।
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Frequently asked questions
अक्षय तृतीया पर सोना खरीदना क्यों शुभ माना जाता है?
स्वर्ण को माता लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। चूंकि 'अक्षय' का अर्थ कभी न घटने वाला है, इसलिए इस दिन स्वर्ण क्रय करने से घर में स्थायी समृद्धि और संपदा का वास होता है।
अक्षय तृतीया पर किन वस्तुओं का दान महापुण्यकारी होता है?
इस दिन जल से भरे मिट्टी के घड़े, जौ, सत्तू, पंखा, छाता, खरबूजा और अन्न का दान करने से पितरों को तृप्ति मिलती है और अक्षय पुण्यों की प्राप्ति होती है।
अक्षय तृतीया को 'अबूझ मुहूर्त' क्यों कहा जाता है?
यह वर्ष के 'साढ़े तीन शुभ मुहूर्तों' में से एक है। इस दिन ग्रहों की स्थिति स्वतः अत्यंत शुभ होती है, इसलिए विवाह, गृह प्रवेश या व्यापार शुरू करने के लिए पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं होती।
