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Ghats of Varanasi at dusk

दैनिक गौरी पंचांगम (Gowri Panchangam)

दिन एवं रात्रि के 8-8 गौरी मुहूर्त (अमृत, शुभ, लाभ, धन) का अपने शहर अनुसार सटीक व तात्कालिक समय देखें।

दक्षिण भारत एवं वैदिक पद्धति

आज का गौरी पंचांगम — नई दिल्ली

दिन एवं रात्रि के 8-8 गौरी मुहूर्त (अमृत, शुभ, लाभ, धन, उत्ति, रोग, विष, सोर) का प्रामाणिक समय।

वर्तमान सक्रिय गौरी मुहूर्त

अमृत

परम शुभ

अमृत तुल्य शुभ समय। सभी मांगलिक कार्य, पूजा व यात्रा हेतु सर्वश्रेष्ठ।

समय सीमा

04:46 pm06:18 pm

मुहूर्त 1अशुभ (रोग)

रोग(ரோகம்)

06:09 am07:40 am

शारीरिक अस्वस्थता व कष्ट का भय। नए कार्य टालें।

मुहूर्त 2लाभकारी

लाभ(லாபம்)

07:40 am09:11 am

व्यापारिक लाभ, धन निवेश व वित्तीय कार्यों हेतु फलदायी।

मुहूर्त 3शुभ

शुभ(சுபம்)

09:11 am10:42 am

शुभ व कल्याणकारी। विवाह वार्ता, भूमि क्रय व नए अनुबंध हेतु उत्तम।

मुहूर्त 4अति अशुभ (विष)

विष(விஷம்)

10:42 am12:13 pm

विष तुल्य घातक प्रभाव। वाद-विवाद, दुर्घटना व नुकसान की आशंका रहती है।

मुहूर्त 5अशुभ (चोर)

चोर / सोर(சோரம்)

12:13 pm01:44 pm

चोरी, कपट व धन हानि का भय। यात्रा व उधार लेन-देन से बचें।

मुहूर्त 6शुभ (धन)

धन(தனம்)

01:44 pm03:15 pm

धन संपदा में वृद्धि, रुका धन वापस पाने व आभूषण खरीदने हेतु अनुकूल।

मुहूर्त 7मध्यम

उत्ति / उद्यम(உத்தி)

03:15 pm04:46 pm

मध्यम फल। दैनिक सामान्य कार्यों व परिश्रम हेतु उपयुक्त।

मुहूर्त 8परम शुभ

अमृत(அமிர்தம்)

04:46 pm06:18 pm

अमृत तुल्य शुभ समय। सभी मांगलिक कार्य, पूजा व यात्रा हेतु सर्वश्रेष्ठ।

अभी सक्रिय है

गौरी पंचांगम का शास्त्रीय महत्व एवं नियम

शुभ गौरी (अमृत, शुभ, लाभ, धन)

यह चार मुहूर्त सर्वसिद्धिदायक माने गए हैं। इनमें व्यापार आरंभ, गृह प्रवेश, आभूषण क्रय, विवाह वार्ता एवं शुभ यात्राएं निर्विघ्न संपन्न होती हैं।

उत्ति / उद्यम (Uthi)

उत्ति मध्यम फलदायी है। यह सामान्य दैनिक कार्यों, अध्ययन एवं परिश्रम के लिए उपयुक्त है, परंतु अत्यधिक महत्वपूर्ण कार्यों से बचना चाहिए।

अशुभ गौरी (रोग, विष, सोर)

रोग, विष और सोर में नए कार्यों का शुभारंभ, यात्रा और वित्तीय लेन-देन वर्जित हैं। इस काल में केवल ईश्वर आराधना व नाम जप हितकर है।

गौरी पंचांगम से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

गौरी पंचांगम क्या है और इसका क्या महत्व है?

गौरी पंचांगम दक्षिण भारत (विशेष रूप से तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश) में अत्यंत लोकप्रिय सूक्ष्म मुहूर्त प्रणाली है। इसमें दिन और रात को 8-8 बराबर भागों में विभाजित किया जाता है, जिन्हें 8 गौरी स्वरूप (अमृत, शुभ, लाभ, धन, उत्ति, रोग, विष, सोर) कहा जाता है।

गौरी पंचांगम में कौन से समय शुभ (नल्ला नेरम) होते हैं?

अमृत, शुभ, लाभ और धन यह चार काल सर्वसिद्धिदायक 'नल्ला नेरम' (शुभ समय) माने गए हैं। इनमें नया व्यापार, यात्रा, गृह प्रवेश, विवाह वार्ता एवं महत्वपूर्ण अनुबंध अत्यंत सफल होते हैं।

चौघड़िया और गौरी पंचांगम में क्या अंतर है?

दोनों प्रणालियां दिन व रात को 8-8 भागों में बांटती हैं, परंतु चौघड़िया उत्तर व पश्चिम भारत में प्रचलित ग्रहाधिपति आधारित प्रणाली है, जबकि गौरी पंचांगम दक्षिण भारतीय आगमों पर आधारित देवी गौरी की पावन मुहूर्त परंपरा है।