
हिन्दू कैलेंडर 2026 एवं पंचांग
दैनिक तिथि, नक्षत्र, शुभ मुहूर्त, राहु काल, एकादशी, व्रत और प्रमुख हिन्दू त्यौहारों की अपने शहर अनुसार सटीक गणना देखें।
शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026
शुक्रवार
वैदिक पंचांग के मुख्य अंग
सूर्य एवं चंद्र चक्र
शुभ मुहूर्त
ध्यान एवं साधना हेतु
शुभ कार्यों एवं यात्रा हेतु
पूजा-अनुष्ठान हेतु
अशुभ काल
नए कार्य आरम्भ न करें
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात् ॥
Invites purity, auspicious wealth, marital harmony, and graceful prosperity.
करवा चौथ(Karwa Chauth)
सुहागिन महिलाओं द्वारा पति की दीर्घायु और अखण्ड सौभाग्य के लिए किया जाने वाला निर्जला व्रत।
आगामी व्रत एवं त्यौहार
अपने आगामी धार्मिक अनुष्ठानों व व्रतों की योजना बनाएं
व्यक्तिगत एकादशी एवं व्रत की सूचनाएं
कभी भी कोई एकादशी व्रत, प्रदोष अथवा शुभ मुहूर्त न भूलें। अपने शहर और इष्टदेव के अनुसार समय पर व्हाट्सएप एवं कैलेंडर अलर्ट प्राप्त करें।
घर एवं मंदिर के लिए सनातन पंचांग दीवार कैलेंडर प्रिंट करें
अपने शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त, विक्रम संवत्, एकादशी और सम्पूर्ण पर्वों की सूची के साथ उच्च गुणवत्ता वाला A4 दीवार पोस्टर एक क्लिक में प्रिंट करें या PDF डाउनलोड करें।
हिन्दू कैलेंडर से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
हिन्दू चंद्र कैलेंडर (पंचांग) कैसे कार्य करता है?
हिन्दू कैलेंडर सूर्य और चंद्रमा दोनों की खगोलीय गतियों पर आधारित एक चंद्र-सौर (लूनिसोलर) प्रणाली है। इसमें पांच मुख्य अंग होते हैं: तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार। इन्हीं के आधार पर शुभ-अशुभ मुहूर्त और पर्व निर्धारित होते हैं।
विभिन्न शहरों में तिथि का समय क्यों बदल जाता है?
यद्यपि चंद्रमा और सूर्य का कोणीय अंतर पूरे विश्व में एक ही समय पर बदलता है, परन्तु स्थानीय सूर्योदय का समय प्रत्येक नगर के अक्षांश व देशांतर के अनुसार भिन्न होता है। अधिकांश हिन्दू व्रत एवं पर्व उदयातिथि (सूर्योदय के समय उपस्थित तिथि) के अनुसार मान्य होते हैं।
पूर्णिमान्त और अमान्त पंचांग में क्या अंतर है?
उत्तर भारत में पूर्णिमान्त मास चलता है जहाँ माह का समापन पूर्णिमा को होता है। वहीं महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत में अमान्त मास चलता है जहाँ माह का समापन अमावस्या को होता है। शुक्ल व कृष्ण पक्ष की तिथियाँ दोनों में समान रहती हैं।
पूजा और नए कार्यों के लिए कौन से मुहूर्त सर्वश्रेष्ठ माने जाते हैं?
ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से 96 से 48 मिनट पूर्व), अभिजित मुहूर्त (दोपहर, बुधवार को छोड़कर), गोधूलि मुहूर्त और अमृत काल को किसी भी शुभ कार्य, पूजा-अर्चना एवं यात्रा के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है।
