ग्रहण का वैज्ञानिक, ज्योतिषीय एवं तात्विक प्रभाव — विस्तृत विवेचन
वैदिक ऋषि-मुनियों ने सहस्रों वर्ष पूर्व राहु और केतु को 'छाया ग्रह' (Mathematical Shadow Points) के रूप में निरूपित किया था। आधुनिक खगोल विज्ञान भी इसे Lunar Nodes (Ascending and Descending Nodes) के रूप में मान्यता देता है।
१. ग्रहण काल में मंत्र सिद्धि का रहस्य
शास्त्रों में ग्रहण काल को 'सिद्ध वेला' कहा गया है। इस समय ब्रह्मांडीय विद्युत-चुंबकीय क्षेत्र (Electromagnetic Grid) में तीव्र परिवर्तन होता है। इस कालखंड में किया गया कोई भी मंत्र जप सामान्य काल की तुलना में सहस्र गुना अधिक तीव्र फल प्रदान करता है। गुरु मंत्र, गायत्री मंत्र, अथवा अपने इष्टदेव के नाम का अखंड जप करने से साधक की चेतना का ऊर्ध्वारोहण होता है।


