हनुमान जयंती संपूर्ण मार्गदर्शिका: चोला चढ़ाने की विधि, हनुमान बाहुक एवं संकटमोचन पाठ
हनुमान जयंती पर बजरंगबली को चोला चढ़ाने की सही विधि, चमेली के तेल और सिन्दूर अर्पण के नियम, सुंदरकांड पाठ और संकटमोचन मंत्र जानें।
वैदिक अनुष्ठान एवं पंचांग संपादक मंडल
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चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि को भगवान शिव के 11वें रुद्रावतार, अष्टसिद्धि और नवनिधि के दाता श्री हनुमान जी का जन्मोत्सव मनाया जाता है। संकटमोचन हनुमान जी पराक्रम, असीम बल, निष्काम भक्ति और ब्रह्मचर्य के सर्वोच्च आदर्श हैं। इस दिन भक्तजन उपवास रखते हैं, हनुमान जी को चमेली के तेल युक्त सिंदूरी चोला चढ़ाते हैं और सुंदरकांड व हनुमान चालीसा का पाठ कर सभी प्रकार के संकटों और भय से मुक्ति प्राप्त करते हैं।
Sacred Heritage
Timeless Temple Tradition
Architectural Wonder
Ancient Vedic Mastery
Scriptural Origin
Puranic & Epic History
Spiritual Sadhana
Living Faith & Wisdom
उत्तर भारत में यह पर्व चैत्र पूर्णिमा को सूर्योदय व्यापिनी तिथि में मनाया जाता है।
हनुमान जयंती: आध्यात्मिक महत्व, सिंदूर अर्पण (चोला) विधि एवं सिद्ध मंत्र
सनातन धर्म में अदम्य साहस, अपार शक्ति, परम बुद्धि और निस्वार्थ भक्ति के साक्षात प्रतीक भगवान श्री हनुमान का प्राकट्य दिवस यानी हनुमान जयंती (हनुमान जन्मोत्सव) अत्यंत उत्साह और भक्तिभाव से मनाया जाता है। भगवान शिव के 11वें रुद्रावतार, माता अंजना और वानरराज केसरी के तेजस्वी पुत्र तथा पवनदेव के मानस पुत्र होने के कारण उन्हें 'पवनपुत्र', 'आंजनेय', 'केसरीनंदन' और 'बजरंगबली' कहा जाता है। वे कलयुग के जाग्रत और अमर (चिरंजीवी) देवता हैं, जो धर्म की रक्षा और भक्तों के संकटों का निवारण करने के लिए सदैव इस पृथ्वी पर उपस्थित रहते हैं।
उत्तर भारत में हनुमान जयंती चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। वहीं दक्षिण भारत के आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु में इसे क्रमशः वैशाख और मार्गशीर्ष मास में मनाने की समृद्ध परंपरा है। इस पावन दिवस का सबसे प्रमुख और फलदायी अनुष्ठान है—सिंदूर अर्पण (चोला चढ़ाना)। चमेली के तेल में नारंगी सिंदूर मिलाकर प्रभु को अर्पित करने और सिद्ध मंत्रों का जप करने से सभी प्रकार के ग्रह दोष (शनि-मंगल), भय, भूत-पिशाच बाधा और जीवन के असाध्य संकट तत्काल दूर हो जाते हैं।
"मनोजवं मारुततुल्यवेगं, जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं, श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥"
(अर्थात: जिनकी मन के समान गति और वायु के समान तीव्र वेग है, जिन्होंने अपनी समस्त इंद्रियों पर पूर्ण विजय प्राप्त कर ली है, जो बुद्धिमानों में सर्वश्रेष्ठ हैं, उन पवनपुत्र, वानर सेना के सेनापति और भगवान श्री राम के अनन्य दूत श्री हनुमान जी के चरणों में मैं शरण लेता हूं।)
संक्षिप्त परिचय और मुख्य तथ्य
| विषय | धार्मिक एवं शास्त्रीय विवरण |
|---|---|
| पर्व का नाम | हनुमान जयंती (हनुमान जन्मोत्सव) |
| दिव्य अवतार | भगवान शिव के 11वें रुद्रावतार (चिरंजीवी महाबली) |
| प्रमुख हिन्दू तिथि | चैत्र मास, शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि (चैत्र पूर्णिमा) |
| ज्योतिषीय प्रभाव | शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और मंगल दोष (मांगलिक दोष) से पूर्ण मुक्ति |
| सर्वश्रेष्ठ पूजा अर्पण | सिंदूर का चोला (शुद्ध चमेली का तेल और नारंगी सिंदूर का लेप) |
| प्रिय पुष्प एवं पत्ते | आक (मदार) के फूल, तुलसी पत्र की माला और मीठा पान का बीड़ा |
| मुख्य महाप्रसाद (भोग) | बूंदी, बेसन के लड्डू, मोतीचूर के लड्डू, गुड़-चना और पके पीले केले |
| दिव्य शक्तियां | अष्ट सिद्धि (आठ अलौकिक सिद्धियां) और नवनिधि (नौ दिव्य निधियां) के दाता |
संकटमोचन स्वरूप का आध्यात्मिक महत्व
वाल्मीकि रामायण के अनुसार, जब भगवान श्री राम अपना अवतार कार्य पूर्ण कर साकेत धाम (वैकुंठ) लौटने लगे, तब हनुमान जी ने अपने प्रभु से प्रार्थना की कि जब तक इस पृथ्वी पर राम-कथा और राम-नाम का गान होता रहेगा, वे इसी धरती पर रहकर भक्तों की रक्षा करेंगे।
उन्हें 'संकटमोचन' क्यों कहा जाता है?
- शनिदेव पर विजय: लंकापति रावण ने जब सभी नौ ग्रहों को अपने सिंहासन के पैरों के नीचे बंदी बना रखा था, तब हनुमान जी ने रावण का मानमर्दन कर शनिदेव को मुक्त कराया था। तब शनिदेव ने वचन दिया था कि जो भी भक्त हनुमान जी की शरण में रहेगा, शनि की वक्र दृष्टि कभी उसका अनिष्ट नहीं कर सकेगी।
- ज्ञान और पराक्रम का समन्वय: अपार शारीरिक बल के स्वामी होने के साथ-साथ हनुमान जी समस्त वेदों, व्याकरण और नव-व्याकरण के प्रकांड विद्वान हैं। वे विद्यार्थियों के लिए बुद्धि-दाता और साधकों के लिए आत्मबल के परम प्रेरणास्रोत हैं।
सिंदूर अर्पण (चोला चढ़ाने) की पावन पौराणिक कथा
हनुमान जी की प्रतिमा पर सिंदूर का चोला चढ़ाने की परंपरा रामायण काल के एक अत्यंत भावुक और अलौकिक प्रसंग से जुड़ी है:
भक्ति का अगाध समर्पण
अयोध्या में राज्याभिषेक के उपरांत एक सुबह हनुमान जी ने देखा कि माता सीता अपनी मांग में चमकीला नारंगी सिंदूर लगा रही हैं। बालक स्वभाव वाले सरल हृदय हनुमान जी ने कौतूहलवश पूछा: "हे माता! आप अपने मस्तक पर यह लाल चूर्ण क्यों लगा रही हैं?"
माता सीता ने मुस्कुराते हुए स्नेह से कहा: "हे पवनपुत्र! यह सिंदूर लगाने से तुम्हारे स्वामी श्री राम की आयु लंबी होती है, उनका स्वास्थ्य उत्तम रहता है और वे अत्यंत प्रसन्न होते हैं।"
हनुमान जी ने विचार किया कि जब चुटकी भर सिंदूर लगाने से प्रभु श्री राम की आयु लंबी होती है और वे प्रसन्न होते हैं, तो यदि मैं अपने पूरे शरीर पर सिंदूर पोत लूं, तो मेरे प्रभु अमर हो जाएंगे और उनका जीवन सदैव आनंदमय रहेगा।
यह सोचते ही हनुमान जी बाजार गए, बहुत सारा सिंदूर लेकर आए और अपने पूरे शरीर—सिर से लेकर पैर के नाखूनों और पूंछ तक—नारंगी सिंदूर का लेप कर लिया। जब वे इस रूप में राजसभा में पहुंचे, तो सभी लोग आश्चर्यचकित रह गए, परंतु अंतर्यामी भगवान श्री राम हनुमान जी की निष्कपट और पराकाष्ठा वाली भक्ति को देखकर भावविभोर हो गए। उन्होंने हनुमान जी को गले से लगा लिया और वरदान दिया:
"जो कोई भी व्यक्ति मंगलवार, शनिवार अथवा हनुमान जयंती पर हनुमान जी को चमेली के तेल के साथ सिंदूर (चोला) अर्पित करेगा, उसके जीवन के सभी कष्ट, भूत-बाधा, ग्रह-दोष और असाध्य रोग नष्ट हो जाएंगे और मेरी कृपा सदैव उस पर बनी रहेगी।"
चरण-दर-चरण सिंदूर अर्पण विधि (चोला चढ़ाने का नियम)
हनुमान जी को चोला चढ़ाना एक अत्यंत पवित्र और शास्त्रीय अनुष्ठान है। इसे पूर्ण पवित्रता और ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए संपन्न करना चाहिए:
- शारीरिक शुद्धि: साधक प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ लाल, पीले या केसरिया रंग के वस्त्र धारण करे। महिलाएं हनुमान जी के बाल ब्रह्मचारी स्वरूप का सम्मान करते हुए मूर्ति को प्रत्यक्ष स्पर्श न करें; वे पुजारी के माध्यम से चोला चढ़वा सकती हैं अथवा प्रभु के चरणों में सिंदूर व पुष्प अर्पित कर सकती हैं।
- प्रतिमा का स्नान (प्रक्षाल): सबसे पहले प्रतिमा को गंगाजल, गुलाब जल और कच्चे गाय के दूध से स्नान कराएं। इसके पश्चात स्वच्छ सूती वस्त्र से प्रतिमा को पोंछकर सुखा लें।
- सिंदूर और चमेली के तेल का मिश्रण: शुद्ध नारंगी सिंदूर में शुद्ध चमेली का तेल मिलाएं।
- चमेली का तेल ही क्यों? आयुर्वेद और तंत्र शास्त्र के अनुसार, चमेली का तेल अत्यंत शीतल और सुगंधित होता है। यह हनुमान जी के उग्र और तेजस्वी रुद्रावतार को शीतलता और परम शांति प्रदान करता है।
- चोला लेपन: अपने दाहिने हाथ की अनामिका उंगली से या चांदी के ब्रश से इस लेप को हनुमान जी के चरणों (बाएं पैर से शुरू करके) से ऊपर की ओर ले जाते हुए पूरे शरीर, गदा और मस्तक तक लगाएं।
- चांदी का वर्क लगाना: सिंदूर लगाने के पश्चात प्रभु के वक्षस्थल, भुजाओं और मुकुट पर शुद्ध चांदी का वर्क (तप) श्रद्धापूर्वक चिपकाएं।
- वस्त्र व जनेऊ अर्पण:
- प्रभु के बाएं कंधे से दाएं कमर की ओर नया सूती जनेऊ अर्पित करें।
- लाल या केसरिया रंग का नया लंगोट (वस्त्र) धारण कराएं।
- आक (मदार) के 11 या 21 फूलों की माला पहनाएं।
- 11 या 21 नागरवेल (पान) के पत्तों का बीड़ा: प्रत्येक पत्ते पर चंदन से 'श्री राम' लिखें। इस पान में केवल लौंग, इलायची और मीठा गुलकंद होना चाहिए; इसमें चूना, कत्था, तंबाकू या सुपारी का प्रयोग कदापि न करें।
- महाभोग: बेसन या मोतीचूर के लड्डू, भुने चने, गुड़ और ताजे पीले केलों का भोग लगाएं।
- आरती और दीप: गाय के शुद्ध घी का चौमुखा दीपक और कपूर जलाकर भावपूर्ण आरती करें और हनुमान चालीसा का पाठ करें।
हनुमान जयंती के अचूक एवं सिद्ध मंत्र
इस पावन तिथि पर निम्नलिखित मंत्रों का जप करने से आत्मबल, रोग-मुक्ति और संकटों से तत्काल रक्षा प्राप्त होती है:
1. हनुमान मूल मंत्र (दैनिक सुरक्षा हेतु)
"ॐ हं हनुमते नमः॥"
फल: यह मंत्र नकारात्मक ऊर्जा, भय और अवसाद को समाप्त कर शरीर के चारों ओर एक अभेद्य सुरक्षा कवच बनाता है।
2. असाध्य-साधक मंत्र (असंभव कार्य को सिद्ध करने हेतु)
"असाध्य-साधक स्वामिन् असाध्यं तव किं वद।
राम-दूत कृपा-सिन्धो मत्-कार्यं साधय प्रभो॥"
अर्थ: "हे असंभव को भी संभव करने वाले स्वामी! संसार में ऐसा कौन सा कार्य है जो आपके लिए असाध्य हो? हे श्री राम के परम कृपा-सिंधु दूत! आप मेरे इस कठिन कार्य को सिद्ध करने की कृपा करें।"
3. शनि दोष निवारण मंत्र (साढ़ेसाती व ढैय्या से मुक्ति)
"मर्कटेश महोत्साह सर्वशोक-विनाशक।
शत्रून् संहर मां रक्ष श्रियं दापय मे प्रभो॥"
फल: शनि की महादशा, साढ़ेसाती, मुकदमों, कर्ज और शत्रुओं के भय से मुक्ति दिलाने वाला अचूक मंत्र।
4. श्री हनुमान चालीसा का पाठ
गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित श्री हनुमान चालीसा का 7, 11 या 100 बार पाठ करने से दैहिक, दैविक और भौतिक—तीनों तापों का नाश हो जाता है।
क्या करें और क्या न करें (नियम और सावधानियां)
| क्या करें (अनिवार्य नियम) | क्या न करें (सख्त वर्जनाएं) |
|---|---|
| मन, वचन और कर्म से पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करें। | तामसिक आहार न लें: घर में मांसाहार, मदिरा, अंडा, लहसुन और प्याज पूरी तरह वर्जित है। |
| चोले के लिए नारंगी सिंदूर में केवल शुद्ध चमेली का तेल ही मिलाएं। | चोले में सरसों का तेल न मिलाएं: सरसों का तेल केवल दीपक जलाने के लिए प्रयोग करें। |
| पान के बीड़े के पत्तों पर चंदन से 'श्री राम' अवश्य लिखें। | अपवित्र हाथों से स्पर्श न करें: बिना स्नान किए या अशुद्ध अवस्था में पूजा न करें। |
| बंदरों, गायों और निर्धनों को गुड़-चना व फल प्रेम से खिलाएं। | महिलाएं मूर्ति को स्पर्श न करें: महिलाएं दूर से चरणों में भाव-प्रणाम अर्पित करें। |
| पाठ के समय गाय के घी का अखंड दीपक जलता रहना चाहिए। | बासी फूल न चढ़ाएं: मुरझाए या जमीन पर गिरे हुए फूलों का प्रयोग न करें। |
अक्सर पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण प्रश्न (FAQs)
1. भारत में हनुमान जयंती अलग-अलग तिथियों पर क्यों मनाई जाती है?
उत्तर भारत में इसे चैत्र पूर्णिमा (भगवान के प्राकट्य दिवस) पर मनाया जाता है। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में चैत्र पूर्णिमा से 41 दिन का मंडल व्रत शुरू होकर वैशाख कृष्ण दशमी को समाप्त होता है। तमिलनाडु में यह मार्गशीर्ष मास की अमावस्या (मूल नक्षत्र) को मनाई जाती है। कुछ स्थानों पर दीपावली की पूर्व संध्या (नरक चतुर्दशी) पर भी विजयोत्सव के रूप में जन्मोत्सव मनाया जाता है।
2. सिंदूर में सरसों का तेल क्यों नहीं मिलाना चाहिए?
सरसों का तेल अत्यंत तीक्ष्ण, गर्म और आक्रामक माना जाता है, जिसका प्रयोग तंत्र-मंत्र और दीपक के लिए होता है। हनुमान जी को चोला एक शीतल और भक्तिमय प्रेम के भाव से चढ़ाया जाता है, इसलिए चमेली का शीतल तेल या गाय का शुद्ध घी ही शास्त्रसम्मत है।
3. क्या महिलाएं हनुमान चालीसा का पाठ और व्रत कर सकती हैं?
हां, बिल्कुल। भगवान हनुमान प्रत्येक स्त्री को माता सीता के समान पूज्य मानते हैं। महिलाएं श्रद्धापूर्वक हनुमान चालीसा, सुंदरकांड का पाठ और व्रत कर सकती हैं। केवल उनके बाल ब्रह्मचर्य व्रत के सम्मान हेतु मूर्ति का सीधा शारीरिक स्पर्श करने से बचना चाहिए।
4. हनुमान जी को मीठा पान क्यों चढ़ाया जाता है?
रामायण में उल्लेख है कि जब हनुमान जी लंका में माता सीता की खोज करके सकुशल लौटने का समाचार लाए, तो माता सीता ने अत्यधिक प्रसन्न होकर पास की लता से एक पान का पत्ता तोड़कर हनुमान जी के मस्तक पर विजय के मुकुट स्वरूप रख दिया था। तभी से प्रभु को मीठा पान अर्पित करने की परंपरा है।
निष्कर्ष
भगवान श्री हनुमान कोई दूरस्थ देवता नहीं, बल्कि कलयुग के साक्षात जागृत प्राण हैं, जो सच्चे मन से पुकारने वाले हर आर्त भक्त की रक्षा के लिए तत्पर रहते हैं। उनकी साधना हमें सिखाती है कि असीम शक्ति होने के बावजूद निरहंकारी और विनम्र कैसे रहा जाता है। जब कोई भक्त हनुमान जयंती पर प्रभु को पावन सिंदूर अर्पित करता है और राम-नाम का संकीर्तन करता है, तो उसके भीतर का समस्त अंधकार, भय और कमजोरी समाप्त हो जाती है और जीवन में अपार विजय, साहस और शांति का उदय होता है।
"बजरंगबली की जय! पवनसुत हनुमान जी की असीम कृपा से आपके जीवन के सभी संकट टलें, आपको उत्तम स्वास्थ्य, अटूट आत्मबल, यश और परम शांति की प्राप्ति हो।"
Why this matters today
हनुमान जयंती पर बजरंगबली को चोला चढ़ाने की सही विधि, चमेली के तेल और सिन्दूर अर्पण के नियम, सुंदरकांड पाठ और संकटमोचन मंत्र जानें।
Frequently asked questions
हनुमान जी को सिन्दूर और चमेली का तेल (चोला) क्यों चढ़ाया जाता है?
माता सीता को मांग में सिन्दूर लगाते देख जब हनुमान जी ने जाना कि इससे प्रभु राम की आयु बढ़ती है, तो उन्होंने अपने संपूर्ण शरीर पर सिन्दूर लगा लिया ताकि प्रभु सदा अमर रहें।
हनुमान पूजा से शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव कैसे शांत होता है?
लंका में रावण के बंधन से शनिदेव को मुक्त कराने पर शनिदेव ने वचन दिया था कि वे हनुमान जी के भक्तों को कभी पीड़ा नहीं पहुंचाएंगे।
हनुमान जयंती पर हनुमान चालीसा का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
इस पावन दिन पर 11, 21 या 100 बार हनुमान चालीसा का एकाग्रचित्त पाठ करने से सभी सिद्धियां और संकटों से मुक्ति मिलती है।
