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स्तोत्र एवं चालीसा8 min read

श्री शिव चालीसा

श्री शिव चालीसा के बारे में पढ़ें। जानें शिव चालीसा पाठ के लाभ, सही समय और विधि। सुख, शांति और मोक्ष प्राप्ति के लिए नित्य पाठ करें।

अयोध्या दास

Writer & Research Team

Updated: 2026-08-26
ध्यान मुद्रा में भगवान शिव
स्तोत्र एवं चालीसा

शिव चालीसा भगवान शिव को समर्पित 40 चौपाइयों का एक अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र है, जिसे अयोध्या दास जी द्वारा रचित माना जाता है। इसमें भगवान शिव के दिव्य स्वरूप और उनकी अपार करुणा का वर्णन है। मान्यता है कि जो भी व्यक्ति पूर्ण श्रद्धा के साथ नित्य शिव चालीसा का पाठ करता है, भगवान शिव उसकी सभी बाधाएं दूर करते हैं और उसे सुख, शांति और मोक्ष का आशीर्वाद देते हैं।

Sacred Heritage

Timeless Temple Tradition

Architectural Wonder

Ancient Vedic Mastery

Scriptural Origin

Puranic & Epic History

Spiritual Sadhana

Living Faith & Wisdom

॥ दोहा ॥ जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान । कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान ॥ ॥ चौपाई ॥ जय गिरिजा पति दीन दयाला । सदा करत सन्तन प्रतिपाला ॥ भाल चन्द्रमा सोहत नीके । कानन कुण्डल नागफनी के ॥ अंग गौर शिर गंग बहाये । मुण्डमाल तन क्षार लगाए ॥ वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे । छवि को देखि नाग मन मोहे ॥ मैना मातु की हवे दुलारी । बाम अंग सोहत छवि न्यारी ॥ कर त्रिशूल सोहत छवि भारी । करत सदा शत्रुन क्षयकारी ॥ नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे । सागर मध्य कमल हैं जैसे ॥ कार्तिक श्याम और गणराऊ । या छवि को कहि जात न काऊ ॥ देवन जबहीं जाय पुकारा । तब ही दुख प्रभु आप निवारा ॥ किया उपद्रव तारक भारी । देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी ॥ तुरत षडानन आप पठायउ । लवनिमेष महँ मारि गिरायउ ॥ आप जलंधर असुर संहारा । सुयश तुम्हार विदित संसारा ॥ त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई । सबहिं कृपा कर लीन बचाई ॥ किया तपहिं भागीरथ भारी । पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी ॥ दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं । सेवक स्तुति करत सदाहीं ॥ वेद नाम महिमा तव गाई। अकथ अनादि भेद नहिं पाई ॥ प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला । जरत सुरासुर भए विहाला ॥ कीन्ही दया तहं करी सहाई । नीलकण्ठ तब नाम कहाई ॥ पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा । जीत के लंक विभीषण दीन्हा ॥ सहस कमल में हो रहे धारी । कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी ॥ एक कमल प्रभु राखेउ जोई । कमल नयन पूजन चहं सोई ॥ कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर । भए प्रसन्न दिए इच्छित वर ॥ जय जय जय अनन्त अविनाशी । करत कृपा सब के घटवासी ॥ दुष्ट सकल नित मोहि सतावै । भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै ॥ त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो । येहि अवसर मोहि आन उबारो ॥ लै त्रिशूल शत्रुन को मारो । संकट से मोहि आन उबारो ॥ मात-पिता भ्राता सब होई । संकट में पूछत नहिं कोई ॥ स्वामी एक है आस तुम्हारी । आय हरहु मम संकट भारी ॥ धन निर्धन को देत सदा हीं । जो कोई जांचे सो फल पाहीं ॥ अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी । क्षमहु नाथ अब चूक हमारी ॥ शंकर हो संकट के नाशन । मंगल कारण विघ्न विनाशन ॥ योगी यति मुनि ध्यान लगावैं । शारद नारद शीश नवावैं ॥ नमो नमो जय नमः शिवाय । सुर ब्रह्मादिक पार न पाय ॥ जो यह पाठ करे मन लाई । ता पर होत है शम्भु सहाई ॥ ॠनियां जो कोई हो अधिकारी । पाठ करे सो पावन हारी ॥ पुत्र हीन कर इच्छा जोई । निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई ॥ पण्डित त्रयोदशी को लावे । ध्यान पूर्वक होम करावे ॥ त्रयोदशी व्रत करै हमेशा । ताके तन नहीं रहै कलेशा ॥ धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे । शंकर सम्मुख पाठ सुनावे ॥ जन्म जन्म के पाप नसावे । अन्त धाम शिवपुर में पावे ॥ कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी । जानि सकल दुःख हरहु हमारी ॥ ॥ दोहा ॥ नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा । तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश ॥ मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान । अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण ॥

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श्री शिव चालीसा के बारे में पढ़ें। जानें शिव चालीसा पाठ के लाभ, सही समय और विधि। सुख, शांति और मोक्ष प्राप्ति के लिए नित्य पाठ करें।

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Frequently asked questions

शिव चालीसा पढ़ने का सही समय क्या है?

शिव चालीसा पढ़ने का सबसे उत्तम समय प्रातः काल (ब्रह्म मुहूर्त) या शाम को प्रदोष काल में होता है। सोमवार का दिन भगवान शिव की पूजा के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

शिव चालीसा किसने लिखी है?

शिव चालीसा की रचना पारंपरिक रूप से कवि अयोध्या दास जी द्वारा की गई मानी जाती है।

क्या मैं रात में शिव चालीसा पढ़ सकता हूँ?

हाँ, रात में सोने से पहले शिव चालीसा पढ़ने से मन शांत होता है, नकारात्मक विचार दूर होते हैं और अच्छी नींद आती है।

शिव चालीसा पढ़ते समय व्रत रखने के क्या लाभ हैं?

शिव चालीसा के पाठ के साथ व्रत (विशेषकर सोमवार को) रखने से आध्यात्मिक लाभ कई गुना बढ़ जाता है, जिससे शरीर और मन शुद्ध होते हैं।

शिव चालीसा पढ़ने के मुख्य लाभ क्या हैं?

नियमित पाठ करने से भय दूर होता है, बाधाएं समाप्त होती हैं, मानसिक शांति मिलती है, और अंततः भक्त को मोक्ष की प्राप्ति होती है।