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स्तोत्र एवं चालीसा8 min read

श्री सरस्वती चालीसा

पढ़ें सम्पूर्ण श्री सरस्वती चालीसा हिंदी में। जानें सरस्वती चालीसा पाठ के लाभ, सही समय और विधि। विद्या, ज्ञान और एकाग्रता के लिए नित्य पाठ करें।

पारंपरिक

Writer & Research Team

Updated: 2026-08-26
वीणा बजाते हुए माता सरस्वती
स्तोत्र एवं चालीसा

सरस्वती चालीसा माता सरस्वती को समर्पित 40 चौपाइयों का एक भक्ति स्तोत्र है। माता सरस्वती ज्ञान, विद्या, कला और संगीत की देवी हैं। इस चालीसा का नियमित रूप से पाठ करने से बुद्धि तेज होती है, स्मृति और एकाग्रता में सुधार होता है, और शैक्षणिक तथा कलात्मक सफलता मिलती है। छात्रों और कलाकारों के लिए यह विशेष रूप से अनुशंसित है।

Sacred Heritage

Timeless Temple Tradition

Architectural Wonder

Ancient Vedic Mastery

Scriptural Origin

Puranic & Epic History

Spiritual Sadhana

Living Faith & Wisdom

श्री सरस्वती चालीसा (हिंदी)

॥दोहा॥ !! जनक जननि पद्मरज, निज मस्तक पर धरि, बन्दौं मातु सरस्वती, बुद्धि बल दे दातारि, पूर्ण जगत में व्याप्त तव, महिमा अमित अनंतु, दुष्जनों के पाप को, मातु तु ही अब हन्तु !! !! जय श्री सकल बुद्धि बलरासी।जय सर्वज्ञ अमर अविनाशी, जय जय जय वीणाकर धारी।करती सदा सुहंस सवारी, रूप चतुर्भुज धारी माता।सकल विश्व अन्दर विख्याता, जग में पाप बुद्धि जब होती।तब ही धर्म की फीकी ज्योति !! !! तब ही मातु का निज अवतारी।पाप हीन करती महतारी, वाल्मीकिजी थे हत्यारा।तव प्रसाद जानै संसारा, रामचरित जो रचे बनाई।आदि कवि की पदवी पाई, कालिदास जो भये विख्याता।तेरी कृपा दृष्टि से माता !! !! तुलसी सूर आदि विद्वाना।भये और जो ज्ञानी नाना, तिन्ह न और रहेउ अवलम्बा।केव कृपा आपकी अम्बा, करहु कृपा सोइ मातु भवानी।दुखित दीन निज दासहि जानी, पुत्र करहिं अपराध बहूता।तेहि न धरई चित माता !! !! राखु लाज जननि अब मेरी।विनय करउं भांति बहु तेरी, मैं अनाथ तेरी अवलंबा।कृपा करउ जय जय जगदंबा, मधुकैटभ जो अति बलवाना।बाहुयुद्ध विष्णु से ठाना, समर हजार पाँच में घोरा।फिर भी मुख उनसे नहीं मोरा !! !! मातु सहाय कीन्ह तेहि काला।बुद्धि विपरीत भई खलहाला, तेहि ते मृत्यु भई खल केरी।पुरवहु मातु मनोरथ मेरी, चंड मुण्ड जो थे विख्याता।क्षण महु संहारे उन माता, रक्त बीज से समरथ पापी।सुरमुनि हदय धरा सब काँपी !! !! काटेउ सिर जिमि कदली खम्बा।बारबार बिन वउं जगदंबा, जगप्रसिद्ध जो शुंभनिशुंभा।क्षण में बाँधे ताहि तू अम्बा, भरतमातु बुद्धि फेरेऊ जाई।रामचन्द्र बनवास कराई, एहिविधि रावण वध तू कीन्हा।सुर नरमुनि सबको सुख दीन्हा !! !! को समरथ तव यश गुन गाना।निगम अनादि अनंत बखाना, विष्णु रुद्र जस कहिन मारी।जिनकी हो तुम रक्षाकारी, रक्त दन्तिका और शताक्षी।नाम अपार है दानव भक्षी, दुर्गम काज धरा पर कीन्हा।दुर्गा नाम सकल जग लीन्हा !! !! दुर्ग आदि हरनी तू माता।कृपा करहु जब जब सुखदाता, नृप कोपित को मारन चाहे।कानन में घेरे मृग नाहे, सागर मध्य पोत के भंजे।अति तूफान नहिं कोऊ संगे, भूत प्रेत बाधा या दुःख में।हो दरिद्र अथवा संकट में !! !! नाम जपे मंगल सब होई।संशय इसमें करई न कोई, पुत्रहीन जो आतुर भाई।सबै छांड़ि पूजें एहि भाई, करै पाठ नित यह चालीसा।होय पुत्र सुन्दर गुण ईशा, धूपादिक नैवेद्य चढ़ावै।संकट रहित अवश्य हो जावै!! !! भक्ति मातु की करैं हमेशा।निकट न आवै ताहि कलेशा, बंदी पाठ करें सत बारा।बंदी पाश दूर हो सारा, रामसागर बाँधि हेतु भवानी।कीजै कृपा दास निज जानी !! Doha !! मातु सूर्य कान्ति तव, अन्धकार मम रूप।डूबन से रक्षा करहु परूँ न मैं भव कूप, बलबुद्धि विद्या देहु मोहि, सुनहु सरस्वती मातु।राम सागर अधम को आश्रय तू ही देदातु !!

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पढ़ें सम्पूर्ण श्री सरस्वती चालीसा हिंदी में। जानें सरस्वती चालीसा पाठ के लाभ, सही समय और विधि। विद्या, ज्ञान और एकाग्रता के लिए नित्य पाठ करें।

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Frequently asked questions

सरस्वती चालीसा पढ़ने का सबसे अच्छा समय क्या है?

सुबह जल्दी, विशेष रूप से पढ़ाई या रचनात्मक काम शुरू करने से पहले का समय आदर्श है। बसंत पंचमी सरस्वती पूजा के लिए सबसे शुभ दिन है।

छात्रों को सरस्वती चालीसा क्यों पढ़नी चाहिए?

माता सरस्वती बुद्धि और स्मृति की देवी हैं। उनकी चालीसा का पाठ छात्रों को परीक्षा की चिंता दूर करने, एकाग्रता बढ़ाने और सीखने की क्षमता में सुधार करने में मदद करता है।

सरस्वती पूजा के दौरान क्या चढ़ाना चाहिए?

पीले या सफेद फूल, सफेद मिठाइयाँ (जैसे खीर), और चंदन का लेप पारंपरिक रूप से देवी सरस्वती को चढ़ाया जाता है क्योंकि वह पवित्रता और शांति की प्रतीक हैं।

क्या मैं परीक्षा से पहले सरस्वती चालीसा पढ़ सकता हूँ?

हाँ, कई छात्र परीक्षा में बैठने से पहले स्पष्ट दिमाग और सटीक स्मृति के लिए आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए कुछ चौपाइयां या पूरी चालीसा का पाठ करते हैं।

सरस्वती चालीसा की रचना किसने की?

कई प्राचीन चालीसाओं की तरह, इसके सटीक लेखक अज्ञात हैं और इसका श्रेय पारंपरिक संतों और ऋषियों को दिया जाता है जिन्होंने सदियों से देवी की स्तुतियों का संकलन किया।