Bhakti Voice
स्तोत्र एवं चालीसा8 min read

श्री लक्ष्मी चालीसा

पढ़ें सम्पूर्ण श्री लक्ष्मी चालीसा हिंदी में। जानें लक्ष्मी चालीसा पाठ के लाभ, सही समय और विधि। धन, समृद्धि और कर्ज से मुक्ति के लिए नित्य पाठ करें।

पारंपरिक / रामदास

Writer & Research Team

Updated: 2026-08-26
कमल पर विराजमान माता लक्ष्मी
स्तोत्र एवं चालीसा

लक्ष्मी चालीसा माता लक्ष्मी को समर्पित 40 चौपाइयों का एक मंगलकारी स्तोत्र है। माता लक्ष्मी धन, ऐश्वर्य और सौभाग्य की देवी हैं। मान्यता है कि जो भी भक्त पूर्ण श्रद्धा के साथ लक्ष्मी चालीसा का पाठ करता है, माता रानी उसके जीवन से दरिद्रता और कर्ज दूर कर धन-धान्य और सुख-समृद्धि भर देती हैं।

Sacred Heritage

Timeless Temple Tradition

Architectural Wonder

Ancient Vedic Mastery

Scriptural Origin

Puranic & Epic History

Spiritual Sadhana

Living Faith & Wisdom

श्री लक्ष्मी चालीसा दोहा मातु लक्ष्मी करि कृपा करो हृदय में वास । मनो कामना सिद्ध कर पुरवहु मेरी आस ॥ सिंधु सुता विष्णुप्रिये नत शिर बारंबार । ऋद्धि सिद्धि मंगलप्रदे नत शिर बारंबार ॥ टेक ॥ सिन्धु सुता मैं सुमिरौं तोही । ज्ञान बुद्धि विद्या दो मोहि ॥ तुम समान नहिं कोई उपकारी । सब विधि पुरबहु आस हमारी ॥ जै जै जगत जननि जगदम्बा । सबके तुमही हो स्वलम्बा ॥ तुम ही हो घट घट के वासी । विनती यही हमारी खासी ॥ जग जननी जय सिन्धु कुमारी । दीनन की तुम हो हितकारी ॥ विनवौं नित्य तुमहिं महारानी । कृपा करौ जग जननि भवानी ॥ केहि विधि स्तुति करौं तिहारी । सुधि लीजै अपराध बिसारी ॥ कृपा दृष्टि चितवो मम ओरी । जगत जननि विनती सुन मोरी ॥ ज्ञान बुद्धि जय सुख की दाता । संकट हरो हमारी माता ॥ क्षीर सिंधु जब विष्णु मथायो । चौदह रत्न सिंधु में पायो ॥ चौदह रत्न में तुम सुखरासी । सेवा कियो प्रभुहिं बनि दासी ॥ जब जब जन्म जहां प्रभु लीन्हा । रूप बदल तहं सेवा कीन्हा ॥ स्वयं विष्णु जब नर तनु धारा । लीन्हेउ अवधपुरी अवतारा ॥ तब तुम प्रकट जनकपुर माहीं । सेवा कियो हृदय पुलकाहीं ॥ अपनायो तोहि अन्तर्यामी । विश्व विदित त्रिभुवन की स्वामी ॥ तुम सब प्रबल शक्ति नहिं आनी । कहँ तक महिमा कहौं बखानी ॥ मन क्रम वचन करै सेवकाई । मन-इच्छित वांछित फल पाई ॥ तजि छल कपट और चतुराई । पूजहिं विविध भाँति मन लाई ॥ और हाल मैं कहौं बुझाई । जो यह पाठ करे मन लाई ॥ ताको कोई कष्ट न होई । मन इच्छित फल पावै फल सोई ॥ त्राहि-त्राहि जय दुःख निवारिणी । त्रिविध ताप भव बंधन हारिणि ॥ जो यह चालीसा पढ़े और पढ़ावे । इसे ध्यान लगाकर सुने सुनावै ॥ ताको कोई न रोग सतावै । पुत्र आदि धन सम्पत्ति पावै ॥ पुत्र हीन और सम्पत्ति हीना । अन्धा बधिर कोढ़ी अति दीना ॥ विप्र बोलाय कै पाठ करावै । शंका दिल में कभी न लावै ॥ पाठ करावै दिन चालीसा । ता पर कृपा करैं गौरीसा ॥ सुख सम्पत्ति बहुत सी पावै । कमी नहीं काहू की आवै ॥ बारह मास करै जो पूजा । तेहि सम धन्य और नहिं दूजा ॥ प्रतिदिन पाठ करै मन माहीं । उन सम कोई जग में नाहिं ॥ बहु विधि क्या मैं करौं बड़ाई । लेय परीक्षा ध्यान लगाई ॥ करि विश्वास करैं व्रत नेमा । होय सिद्ध उपजै उर प्रेमा ॥ जय जय जय लक्ष्मी महारानी । सब में व्यापित जो गुण खानी ॥ तुम्हरो तेज प्रबल जग माहीं । तुम सम कोउ दयाल कहूँ नाहीं ॥ मोहि अनाथ की सुधि अब लीजै । संकट काटि भक्ति मोहि दीजे ॥ भूल चूक करी क्षमा हमारी । दर्शन दीजै दशा निहारी ॥ बिन दरशन व्याकुल अधिकारी । तुमहिं अक्षत दुःख सहते भारी ॥ नहिं मोहिं ज्ञान बुद्धि है तन में । सब जानत हो अपने मन में ॥ रूप चतुर्भुज करके धारण । कष्ट मोर अब करहु निवारण ॥ कहि प्रकार मैं करौं बड़ाई । ज्ञान बुद्धि मोहिं नहिं अधिकाई ॥ रामदास अब कहै पुकारी । करो दूर तुम विपति हमारी ॥ दोहा त्राहि त्राहि दुःख हारिणी हरो बेगि सब त्रास । जयति जयति जय लक्ष्मी करो शत्रुन का नाश ॥ रामदास धरि ध्यान नित विनय करत कर जोर । मातु लक्ष्मी दास पर करहु दया की कोर ॥

Why this matters today

पढ़ें सम्पूर्ण श्री लक्ष्मी चालीसा हिंदी में। जानें लक्ष्मी चालीसा पाठ के लाभ, सही समय और विधि। धन, समृद्धि और कर्ज से मुक्ति के लिए नित्य पाठ करें।

?

Frequently asked questions

लक्ष्मी चालीसा पढ़ने का सबसे अच्छा दिन कौन सा है?

माता लक्ष्मी की पूजा के लिए शुक्रवार का दिन सबसे शुभ माना जाता है। हालाँकि, इसे प्रतिदिन, विशेषकर दिवाली और नवरात्रि के दौरान पढ़ने से अपार लाभ मिलता है।

क्या मैं रात में लक्ष्मी चालीसा पढ़ सकता हूँ?

हाँ, शाम के समय (गोधूलि बेला) या रात में स्नान आदि के बाद लक्ष्मी चालीसा पढ़ना घर में समृद्धि को आमंत्रित करने के लिए बहुत शुभ माना जाता है।

लक्ष्मी चालीसा का पाठ सही तरीके से कैसे करें?

स्नान करें, साफ कपड़े पहनें, माँ लक्ष्मी की मूर्ति के सामने घी का दीपक (दीया) जलाएं, लाल फूल चढ़ाएं और सच्चे मन से चालीसा का पाठ करें।

क्या लक्ष्मी चालीसा पढ़ने से कर्ज दूर होता है?

पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, लक्ष्मी चालीसा का निरंतर और भक्तिपूर्ण पाठ देवी को प्रसन्न करता है, जो भक्त को वित्तीय स्थिरता और कर्ज से मुक्ति का आशीर्वाद देती हैं।

लक्ष्मी चालीसा किसने लिखी?

लक्ष्मी चालीसा पीढ़ियों से चली आ रही है। हालांकि इसका सटीक मूल पारंपरिक है, कई रचनाएँ रामदास जैसे भक्त संतों से जुड़ी हैं।