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स्तोत्र एवं चालीसा8 min read

श्री कृष्ण चालीसा

पढ़ें सम्पूर्ण श्री कृष्ण चालीसा हिंदी में। जानें कृष्ण चालीसा पाठ के लाभ, सही समय और विधि। दिव्य आनंद और भक्ति की प्राप्ति के लिए नित्य पाठ करें।

पारंपरिक

Writer & Research Team

Updated: 2026-08-26
बांसुरी बजाते हुए भगवान कृष्ण
स्तोत्र एवं चालीसा

कृष्ण चालीसा भगवान कृष्ण (विष्णु के आठवें अवतार) की स्तुति करने वाला 40 चौपाइयों का एक सुंदर स्तोत्र है। भगवान कृष्ण दिव्य प्रेम, आनंद और गहरे ज्ञान के प्रतीक हैं। इस चालीसा का पाठ करने से गहरी भक्ति जागृत होती है, दुख और अवसाद दूर होते हैं, और भक्त का जीवन शांति और खुशी से भर जाता है।

Sacred Heritage

Timeless Temple Tradition

Architectural Wonder

Ancient Vedic Mastery

Scriptural Origin

Puranic & Epic History

Spiritual Sadhana

Living Faith & Wisdom

श्री कृष्ण चालीसा (हिंदी)

**दोहा** दोहा बंशी शोभित कर मधुर, नील जलद तन श्याम । अरुण अधर जनु बिम्बफल, नयन कमल अभिराम ॥ पूर्ण इन्द्र, अरविन्द मुख, पीताम्बर शुभ साज । जय मनमोहन मदन छवि, कृष्णचन्द्र महाराज ॥ जय यदुनंदन जय जगवंदन । जय वसुदेव देवकी नन्दन ॥ जय यशुदा सुत नन्द दुलारे । जय प्रभु भक्‍तन के दृग तारे ॥ जय नट-नागर, नाग नथैया । कृष्ण कन्हैया धेनु चरैया ॥ पुनि नख पर प्रभु गिरिवर धारो । आओ दीनन कष्ट निवारो ॥ वंशी मधुर अधर धरि टेरौ । होवे पूर्ण विनय यह मेरौ ॥ आओ हरि पुनि माखन चाखो । आज लाज भारत की राखो ॥ गोल कपोल, चिबुक अरुणारे । मृदु मुस्कान मोहिनी डारे ॥ राजित राजिव नयन विशाला । मोर मुकुट वैजन्तीमाला ॥ कुंडल श्रवण, पीत पट आछे । कटि किंकिणी काछनी काछे ॥ नील जलज सुन्दर तनु सोहे । छबि लखि, सुर नर मुनिमन मोहे ॥ मस्तक तिलक, अलक घुंघराले । आओ कृष्ण बांसुरी वाले ॥ करि पय पान, पूतनहि तार्‍यो । अका बका कागासुर मार्‍यो ॥ मधुवन जलत अगिन जब ज्वाला । भै शीतल लखतहिं नंदलाला ॥ सुरपति जब ब्रज चढ़्यो रिसाई । मूसर धार वारि वर्षाई ॥ लगत लगत व्रज चहन बहायो । गोवर्धन नख धारि बचायो ॥ लखि यसुदा मन भ्रम अधिकाई । मुख मंह चौदह भुवन दिखाई ॥ दुष्ट कंस अति उधम मचायो । कोटि कमल जब फूल मंगायो ॥ नाथि कालियहिं तब तुम लीन्हें । चरण चिह्न दै निर्भय कीन्हें ॥ करि गोपिन संग रास विलासा । सबकी पूरण करी अभिलाषा ॥ केतिक महा असुर संहार्‍यो । कंसहि केस पकिड़ दै मार्‍यो ॥ मात-पिता की बन्दि छुड़ाई । उग्रसेन कहँ राज दिलाई ॥ महि से मृतक छहों सुत लायो । मातु देवकी शोक मिटायो ॥ भौमासुर मुर दैत्य संहारी । लाये षट दश सहसकुमारी ॥ दै भीमहिं तृण चीर सहारा । जरासिंधु राक्षस कहँ मारा ॥ असुर बकासुर आदिक मार्‍यो । भक्‍तन के तब कष्ट निवार्‍यो ॥ दीन सुदामा के दुःख टार्‍यो । तंदुल तीन मूंठ मुख डार्‍यो ॥ प्रेम के साग विदुर घर माँगे । दुर्योधन के मेवा त्यागे ॥ लखी प्रेम की महिमा भारी । ऐसे श्याम दीन हितकारी ॥ भारत के पारथ रथ हाँके । लिये चक्र कर नहिं बल थाके ॥ निज गीता के ज्ञान सुनाए । भक्‍तन हृदय सुधा वर्षाए ॥ मीरा थी ऐसी मतवाली । विष पी गई बजाकर ताली ॥ राना भेजा साँप पिटारी । शालीग्राम बने बनवारी ॥ निज माया तुम विधिहिं दिखायो । उर ते संशय सकल मिटायो ॥ तब शत निन्दा करि तत्काला । जीवन मुक्‍त भयो शिशुपाला ॥ जबहिं द्रौपदी टेर लगाई । दीनानाथ लाज अब जाई ॥ तुरतहि वसन बने नंदलाला । बढ़े चीर भै अरि मुंह काला ॥ अस अनाथ के नाथ कन्हैया । डूबत भंवर बचावै नैया ॥ `सुन्दरदास' आस उर धारी । दया दृष्टि कीजै बनवारी ॥ नाथ सकल मम कुमति निवारो । क्षमहु बेगि अपराध हमारो ॥ खोलो पट अब दर्शन दीजै । बोलो कृष्ण कन्हैया की जै ॥ दोहा यह चालीसा कृष्ण का, पाठ करै उर धारि । अष्ट सिद्धि नवनिधि फल, लहै पदारथ चारि ॥

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पढ़ें सम्पूर्ण श्री कृष्ण चालीसा हिंदी में। जानें कृष्ण चालीसा पाठ के लाभ, सही समय और विधि। दिव्य आनंद और भक्ति की प्राप्ति के लिए नित्य पाठ करें।

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Frequently asked questions

कृष्ण चालीसा पढ़ने का सबसे अच्छा समय क्या है?

वैसे तो इसे किसी भी समय पढ़ा जा सकता है, लेकिन सुबह (ब्रह्म मुहूर्त) या शाम का समय आदर्श है। अष्टमी तिथि और जन्माष्टमी विशेष रूप से अत्यधिक शुभ हैं।

कृष्ण चालीसा पढ़ने के क्या लाभ हैं?

यह भावनात्मक स्थिरता लाता है, नकारात्मकता और अवसाद को दूर करता है, प्रेमपूर्ण संबंधों को बढ़ाता है, और भक्त को एक आनंदमय और समृद्ध जीवन प्रदान करता है।

क्या मैं किसी विशेष मनोकामना के लिए कृष्ण चालीसा का पाठ कर सकता हूँ?

हाँ, भक्त अक्सर किसी विशेष नेक इच्छा के लिए या किसी चुनौती से पार पाने के लिए 11, 21 या 40 दिनों तक रोजाना इसका पाठ करने का संकल्प लेते हैं।

कृष्ण चालीसा का पाठ कैसे करें?

भगवान कृष्ण की मूर्ति या तस्वीर के सामने बैठें, मोर पंख या तुलसी के पत्ते (यदि उपलब्ध हों) चढ़ाएं, दीया जलाएं और अपार प्रेम के साथ चौपाइयों को पढ़ें।

भगवान कृष्ण की पूजा तुलसी से क्यों की जाती है?

तुलसी भगवान विष्णु और उनके अवतारों को अत्यंत प्रिय है। पूजा के दौरान तुलसी के पत्ते चढ़ाना भगवान कृष्ण को बहुत प्रसन्न करने वाला माना जाता है।