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स्तोत्र एवं चालीसा8 min read

श्री हनुमान चालीसा

पढ़ें सम्पूर्ण श्री हनुमान चालीसा हिंदी में। जानें हनुमान चालीसा पाठ के लाभ, सही समय और विधि। बल, बुद्धि और विद्या प्राप्ति के लिए नित्य पाठ करें।

गोस्वामी तुलसीदास

Writer & Research Team

Updated: 2026-08-26
भक्तों को आशीर्वाद देते हुए भगवान हनुमान
स्तोत्र एवं चालीसा

हनुमान चालीसा गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित 40 चौपाइयों का एक अत्यंत शक्तिशाली स्तोत्र है। मान्यता है कि जो भी व्यक्ति पूर्ण श्रद्धा और भक्ति के साथ नित्य हनुमान चालीसा का पाठ करता है, संकटमोचन हनुमान उसकी सभी बाधाएं दूर करते हैं और उसे बल, बुद्धि और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।

Sacred Heritage

Timeless Temple Tradition

Architectural Wonder

Ancient Vedic Mastery

Scriptural Origin

Puranic & Epic History

Spiritual Sadhana

Living Faith & Wisdom

श्री हनुमान चालीसा (हिंदी)

**दोहा** श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥ बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार॥ **चौपाई** जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर॥ राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥ महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी॥ कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुंडल कुंचित केसा॥ हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै। काँधे मूँज जनेऊ साजै॥ संकर सुवन केसरीनंदन। तेज प्रताप महा जग बंदन॥ बिद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर॥ प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया॥ सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा॥ भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचंद्र के काज संवारे॥ लाय सजीवन लखन जियाये। श्रीरघुबीर हरषि उर लाये॥ रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥ सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥ सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा॥ जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते। कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते॥ तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा॥ तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना। लंकेस्वर भए सब जग जाना॥ जुग सहस्र जोजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥ प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लांघि गये अचरज नाहीं॥ दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥ राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डरना॥ आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हाँक तें काँपै॥ भूत पिसाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै॥ नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा॥ संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥ सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा॥ और मनोरथ जो कोई लावै। सोइ अमित जीवन फल पावै॥ चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा॥ साधु-संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे॥ अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता॥ राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा॥ तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम-जनम के दुख बिसरावै॥ अन्तकाल रघुबर पुर जाई। जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई॥ और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्ब सुख करई॥ संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥ जै जै जै हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥ जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बंदि महा सुख होई॥ जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा॥ तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय महँ डेरा॥ **दोहा** पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप। राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥

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पढ़ें सम्पूर्ण श्री हनुमान चालीसा हिंदी में। जानें हनुमान चालीसा पाठ के लाभ, सही समय और विधि। बल, बुद्धि और विद्या प्राप्ति के लिए नित्य पाठ करें।

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Frequently asked questions

हनुमान चालीसा पढ़ने का सही समय क्या है?

हनुमान चालीसा पढ़ने का सबसे उत्तम समय सुबह स्नान के बाद या शाम का समय है। वैसे, सच्चे मन और शुद्धता के साथ इसे दिन में किसी भी समय पढ़ा जा सकता है।

हनुमान चालीसा किसने लिखी है?

हनुमान चालीसा की रचना 16वीं शताब्दी में महान संत और कवि गोस्वामी तुलसीदास जी ने अवधी भाषा में की थी।

हनुमान चालीसा का पाठ दिन में कितनी बार करना चाहिए?

नियमित रूप से एक बार पाठ करना बहुत लाभकारी है। विशेष मनोकामना पूर्ति के लिए भक्त इसे 3, 7 या 11 बार पढ़ते हैं। बड़े संकटों को टालने के लिए 100 बार (शत बार पाठ) करने का विधान है।

क्या महिलाएं हनुमान चालीसा पढ़ सकती हैं?

हाँ, बिल्कुल। महिलाएं भी पूर्ण श्रद्धा और भक्ति के साथ हनुमान चालीसा का पाठ कर सकती हैं। भगवान के लिए केवल सच्ची भक्ति मायने रखती है।

हनुमान चालीसा पढ़ने के क्या लाभ हैं?

नित्य पाठ करने से मन का भय दूर होता है, नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है, रोगों से मुक्ति मिलती है और व्यक्ति को बल, बुद्धि व विद्या की प्राप्ति होती है।