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स्तोत्र एवं चालीसा8 min read

श्री दुर्गा चालीसा

पढ़ें सम्पूर्ण श्री दुर्गा चालीसा हिंदी में। जानें दुर्गा चालीसा पाठ के लाभ, सही समय और विधि। देवी दुर्गा की कृपा, शक्ति और सुख-समृद्धि के लिए नित्य पाठ करें।

पारंपरिक / देवीदास

Writer & Research Team

Updated: 2026-08-26
शेर पर सवार माता दुर्गा
स्तोत्र एवं चालीसा

दुर्गा चालीसा माता दुर्गा को समर्पित 40 चौपाइयों का एक अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र है। माता दुर्गा शक्ति और ऊर्जा की सर्वोच्च प्रतीक हैं। मान्यता है कि जो भी भक्त पूर्ण श्रद्धा के साथ नित्य दुर्गा चालीसा का पाठ करता है, माता रानी उसकी सभी बाधाएं और संकट दूर करती हैं तथा उसे असीम साहस, सुख-समृद्धि और शांति का आशीर्वाद देती हैं।

Sacred Heritage

Timeless Temple Tradition

Architectural Wonder

Ancient Vedic Mastery

Scriptural Origin

Puranic & Epic History

Spiritual Sadhana

Living Faith & Wisdom

श्री दुर्गा चालीसा (हिंदी)

नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो अम्बे दुःख हरनी॥ निराकार है ज्योति तुम्हारी। तिहूँ लोक फैली उजियारी॥ शशि ललाट मुख महाविशाला। नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥ रूप मातु को अधिक सुहावे। दरस करत जन अति सुख पावे॥ तुम संसार शक्ति लय कीना। पालन हेतु अन्न धन दीना॥ अन्नपूर्णा हुई जग पाला। तुम ही आदि सुन्दरी बाला॥ प्रलयकाल सब नाशन हारी। तुम गौरी शिवशंकर प्यारी॥ शिव योगी तुम्हरे गुण गावें। ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें॥ रूप सरस्वती को तुम धारा। दे सद्बुद्धि ऋषि मुनि उबारा॥ धरयो रूप नरसिंह को अम्बा। प्रगट भई फाड़कर खम्बा॥ रक्षा करि प्रह्लाद बचायो। हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो॥ लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं। श्री नारायण अंग समाहीं॥ क्षीरसिन्धु में करत विलासा। दयासिन्धु दीजै मन आसा॥ हिंगलाज में तुम्हीं भवानी। महिमा अमित न जात बखानी॥ मातंगी अरु धूमावति माता। भुवनेश्वरी बगला सुख दाता॥ श्री भैरव तारा जग तारिणी। छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी॥ केहरि वाहन सोह भवानी। लांगुर वीर चलत अगवानी॥ कर में खप्पर खड्ग विराजै। जाको देख काल डर भाजै॥ सोहै अस्त्र और त्रिशूला। जाते उठत शत्रु हिय शूला॥ नगरकोट में तुम्हीं विराजत। तिहुँलोक में डंका बाजत॥ शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे। रक्तबीज शंखन संहारे॥ महिषासुर नृप अति अभिमानी। जेहि अघ भार मही अकुलानी॥ रूप कराल कालिका धारा। सेन सहित तुम तिहि संहारा॥ परी गाढ़ सन्तन पर जब जब। भई सहाय मातु तुम तब तब॥ अमरपुरी अरु बासव लोका। तब महिमा सब रहें अशोका॥ ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी। तुम्हें सदा पूजें नर-नारी॥ प्रेम भक्ति से जो जस गावै। दुःख दारिद्र निकट नहिं आवै॥ ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई। जन्म-मरण ताको छुटि जाई॥ जोगी सुर मुनि कहत पुकारी। योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी॥ शंकर आचारज तप कीनो। काम अरु क्रोध जीति सब लीनो॥ निशिदिन ध्यान धरो शंकर को। काहु काल नहिं सुमिरो तुमको॥ शक्ति रूप का मरम न पायो। शक्ति गई तब मन पछतायो॥ शरणागत हुई कीर्ति बखानी। जय जय जय जगदम्ब भवानी॥ भई प्रसन्न आदि जगदम्बा। दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा॥ मोको मातु कष्ट अति घेरो। तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो॥ आशा तृष्णा निपट सतावें। मोह मदान्दिक सब बिनशावें॥ शत्रु नाश कीजै महारानी। सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी॥ करो कृपा हे मातु दयाला। ऋद्धि-सिद्धि दै करहु निहाला॥ जब लगि जिऊँ दया फल पाऊँ। तुम्हरो जस मैं सदा सुनाऊँ॥ श्री दुर्गा चालीसा जो कोई गावै। सब सुख भोग परमपद पावै॥ देवीदास शरण निज जानी। करहु कृपा जगदम्ब भवानी॥

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पढ़ें सम्पूर्ण श्री दुर्गा चालीसा हिंदी में। जानें दुर्गा चालीसा पाठ के लाभ, सही समय और विधि। देवी दुर्गा की कृपा, शक्ति और सुख-समृद्धि के लिए नित्य पाठ करें।

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Frequently asked questions

दुर्गा चालीसा पढ़ने का सही समय क्या है?

दुर्गा चालीसा पढ़ने का सबसे उत्तम समय सुबह स्नान के बाद या शाम का समय है। मंगलवार, शुक्रवार और नवरात्रि के नौ दिन माता दुर्गा की पूजा के लिए विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं।

दुर्गा चालीसा की रचना किसने की?

पारंपरिक रूप से दुर्गा चालीसा के रचयिता देवीदास जी माने जाते हैं। यह माता दुर्गा की स्तुति करने के लिए पीढ़ियों से चली आ रही एक प्राचीन रचना है।

दुर्गा चालीसा का नित्य पाठ करने के क्या लाभ हैं?

नियमित रूप से दुर्गा चालीसा का पाठ करने से भय दूर होता है, शत्रुओं और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा होती है, आर्थिक स्थिरता आती है और असीम आंतरिक शक्ति प्राप्त होती है।

क्या महिलाएं मासिक धर्म के दौरान दुर्गा चालीसा पढ़ सकती हैं?

पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान औपचारिक पूजा से बचा जाता है, लेकिन मानसिक जप करना या फोन/कंप्यूटर पर दुर्गा चालीसा सुनना पूरी तरह स्वीकार्य है, क्योंकि भक्ति मन से होती है।

क्या चालीसा पढ़ते समय दीया जलाना चाहिए?

हाँ, पाठ शुरू करने से पहले शुद्ध घी या सरसों के तेल का दीया (दीपक) जलाना बहुत शुभ माना जाता है। यह वातावरण को शुद्ध करता है और प्रार्थना के दौरान ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है।