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लेपाक्षी मंदिर: हवा में लटकते खंभे का वैज्ञानिक रहस्य और जटायु मोक्ष की पावन गाथा

जानिए आंध्र प्रदेश के लेपाक्षी वीरभद्र मंदिर का विस्मयकारी रहस्य। हवा में झूलता खंभा जो जमीन को नहीं छूता, माता सीता के पदचिह्न और रामायण काल से जुड़ा पावन इतिहास।

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वैदिक स्थापत्य शोध प्रकोष्ठ

Writer & Research Team

Updated: 2026-08-20
लेपाक्षी वीरभद्र मंदिर के हवा में झूलते खंभे के नीचे से कपड़ा निकालते हुए श्रद्धालु
प्राचीन वास्तुकला एवं रामायण

आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में स्थित 'लेपाक्षी वीरभद्र मंदिर' विजयनगर साम्राज्य की वास्तुकला और मूर्तिकला का एक अद्वितीय चमत्कार है। 16वीं शताब्दी में निर्मित यह पावन मंदिर अपने विशाल नक्काशीदार स्तंभों और अखंड (Monolithic) नंदी के लिए तो प्रसिद्ध है ही, किंतु इसका सबसे बड़ा आश्चर्य है इसका **हवा में झूलता खंभा (Hanging Pillar)**। मंदिर के मुख्य नृत्य मंडप को थामने वाले 70 भारी-भरकम ग्रेनाइट खंभों में से एक खंभा जमीन से लगभग आधा इंच ऊपर उठा हुआ है और छत से लटका है। सदियों से श्रद्धालु इसके नीचे से कपड़ा या छड़ी आर-पार निकालकर इसके हवा में लटके होने की पुष्टि करते हैं। रामायण काल से जुड़े इस पवित्र स्थल पर ही पक्षीराज जटायु ने रावण से युद्ध किया था और भगवान राम ने उन्हें 'ले पाक्षी' (उठो पक्षी) कहकर मोक्ष प्रदान किया था। आइए जानते हैं लेपाक्षी के इन अविश्वसनीय रहस्यों को।

Sacred Heritage

Timeless Temple Tradition

Architectural Wonder

Ancient Vedic Mastery

Scriptural Origin

Puranic & Epic History

Spiritual Sadhana

Living Faith & Wisdom

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1. हवा में झूलते खंभे (आकाश स्तंभ) का अनोखा आश्चर्य

विजयनगर साम्राज्य के राजा अच्युतदेव राय के शासनकाल में 1530 ईस्वी में वीरूपाणा और विरूपाक्ष नामक दो भाइयों ने लेपाक्षी में वीरभद्र मंदिर का निर्माण करवाया था। इस मंदिर के नृत्य मंडप में 70 नक्काशीदार ग्रेनाइट के स्तंभ हैं, किंतु इनमें से एक केंद्रीय खंभा पूरी तरह हवा में लटका हुआ है।

यह भारी-भरकम पत्थर का खंभा फर्श से लगभग आधा इंच ऊपर है। इसके नीचे से कपड़ा, चादर या अखबार आसानी से निकाला जा सकता है। आधुनिक निर्माण में खंभे जमीन पर टिककर छत का भार उठाते हैं, किंतु लेपाक्षी का यह खंभा छत से नीचे लटकते हुए पूरे मंडप की गुरुत्वाकर्षण ऊर्जा को संतुलित करता है।

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2. अंग्रेज इंजीनियर का अधूरा प्रयोग और मंदिर का सुरक्षा रहस्य

ब्रिटिश काल में एक अंग्रेज इंजीनियर हैमिल्टन ने इस खंभे का रहस्य जानने की ठानी। उसका मानना था कि खंभे के नीचे कोई गुप्त कील या आधार होगा। उसने लोहे की बड़ी छड़ों से खंभे के आधार को हिलाने का प्रयास किया।

जैसे ही खंभा अपनी जगह से थोड़ा खिसका, आसपास के खंभों पर भारी दबाव आ गया, वे तिरछे होने लगे और मंदिर की छत की पट्टियों में दरारें आने लगीं। इंजीनियर समझ गया कि यह खंभा कोई सामान्य सजावट नहीं, बल्कि पूरे मंदिर की छत को बांधकर रखने वाला मुख्य 'संतुलन बिंदु' (Keystone) है। मंदिर के ढहने के डर से उसने अपना प्रयास तुरंत रोक दिया।

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3. माता सीता का रहस्यमयी पदचिह्न और जल स्रोत

लेपाक्षी मंदिर के परिसर में ठोस ग्रेनाइट चट्टान पर बना लगभग ढाई फीट लंबा एक विशाल पदचिह्न स्थित है। इसे रामायण काल से जोड़कर देखा जाता है।

मान्यता है कि जब रावण पुष्पक विमान से माता सीता का हरण करके ले जा रहा था, तब माता सीता का चरण इस स्थान पर पड़ा था। इस पदचिह्न का सबसे बड़ा रहस्य यह है कि भीषण गर्मी और सूखे के मौसम में भी इसके भीतर से स्वतः जल रिसता रहता है और यह पदचिह्न हमेशा गीला रहता है।

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4. अखंड नंदी और सात फनों वाला नागकलिंग

मंदिर से कुछ दूरी पर एक ही विशाल चट्टान को तराशकर बनाई गई विश्वप्रसिद्ध 'अखंड नंदी' (बसवन्ना) की प्रतिमा है। 15 फीट ऊंची और 27 फीट लंबी यह प्रतिमा अपनी बारीक घंटियों और आभूषणों की नक्काशी के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध है।

इसके अलावा मंदिर के भीतरी प्रांगण में एक ही पत्थर से निर्मित सात फनों वाले 'नागकलिंग' की विशाल प्रतिमा है, जिसके छत्र के नीचे शिवलिंग स्थापित है। लोककथा के अनुसार, शिल्पकारों ने दोपहर का भोजन तैयार होने के अल्प समय में ही इस अद्भुत प्रतिमा को गढ़ दिया था, जो प्राचीन भारत की उन्नत स्थापत्य कला का जीवंत उदाहरण है।

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जानिए आंध्र प्रदेश के लेपाक्षी वीरभद्र मंदिर का विस्मयकारी रहस्य। हवा में झूलता खंभा जो जमीन को नहीं छूता, माता सीता के पदचिह्न और रामायण काल से जुड़ा पावन इतिहास।

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Frequently asked questions

लेपाक्षी मंदिर का लटकता खंभा बिना गिरे हवा में कैसे टिका है?

यह विजयनगर साम्राज्य की उन्नत इंजीनियरिंग और इंटरलॉकिंग भार-वितरण प्रणाली का प्रमाण है। छत का वजन इस प्रकार संतुलित किया गया है कि यह खंभा गुरुत्वाकर्षण के बावजूद जमीन को छुए बिना संपूर्ण मंडप के संतुलन को साधे रखता है।

जब ब्रिटिश इंजीनियर ने इस खंभे को हिलाने का प्रयास किया तो क्या हुआ?

ब्रिटिश शासनकाल में इंजीनियर हैमिल्टन ने इस खंभे का रहस्य जानने के लिए इसे लोहे की छड़ों से खिसकाने का प्रयास किया। जैसे ही खंभा थोड़ा हिला, आसपास के अन्य खंभे झुकने लगे और छत में दरारें आने लगीं, जिससे यह साबित हुआ कि यह खंभा पूरे मंडप का संतुलन बिंदु (Keystone) है।

लेपाक्षी नाम का रामायण से क्या संबंध है?

रावण से युद्ध के बाद घायल होकर गिरे पक्षीराज जटायु को देखकर भगवान श्रीराम ने करुणा से तेलुगु में कहा था—'ले पाक्षी' अर्थात 'उठो पक्षी'। उसी से इस स्थान का नाम लेपाक्षी पड़ा।

लेपाक्षी मंदिर में बने विशाल पदचिह्न का क्या रहस्य है?

मंदिर के चट्टानी फर्श पर लगभग ढाई फीट लंबा एक पदचिह्न खुदा हुआ है, जिसमें से रहस्यमयी रूप से सदैव जल रिसता रहता है। धार्मिक मान्यतानुसार यह माता सीता का पदचिह्न है जब रावण उन्हें ले जा रहा था।