अध्यात्म और कर्मकांड
पितृ पक्ष में मौली या रक्षा सूत्र (कलावा) क्यों नहीं बांधना चाहिए?
वैदिक ज्ञान · 5 मिनट · Updated 2026-08-17

हिंदू धर्म में मौली या कलावा (रक्षा सूत्र) का विशेष महत्व है, जिसे शुभ कार्यों और देवताओं का आशीर्वाद पाने के लिए कलाई पर बांधा जाता है। लेकिन 16 दिनों तक चलने वाले 'पितृ पक्ष' के दौरान नया कलावा बांधने की सख्त मनाही होती है। आखिर सुरक्षा का प्रतीक माना जाने वाला कलावा श्राद्ध के दौरान क्यों नहीं बांधा जाता? आइए इसके पीछे के धार्मिक कारण और नियमों को विस्तार से समझते हैं।
पितृ पक्ष का मूल भाव: उत्सव नहीं, बल्कि स्मरण का समय
पितृ पक्ष 16 दिनों का एक ऐसा पवित्र काल है जो पूरी तरह से पूर्वजों (पितरों) को याद करने और उनके प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए समर्पित है। यह उत्सव मनाने का नहीं, बल्कि सादगी और स्मरण का समय होता है। लाल और पीले रंग से बनी मौली या कलावा मंगल, शुभता, ऊर्जा और देवी-देवताओं के आशीर्वाद का सर्वोच्च प्रतीक माना जाता है। इसे कलाई पर बांधना किसी मांगलिक कार्य या उत्सव की शुरुआत का संकेत देता है, जो श्राद्ध पक्ष की गंभीरता और शोक की भावना के बिल्कुल विपरीत है।
सादगीपूर्ण पूजा का अनिवार्य नियम
पितृ पक्ष में पितरों की पूजा पूरी तरह से सादगी और सरलता के साथ की जाती है। आम दिनों में देवी-देवताओं की पूजा की तरह इसमें कोई भारी सजावट या रंग-बिरंगी चकाचौंध नहीं होती। मान्यता है कि श्राद्ध के दिनों में लाल या पीले रंग का कलावा बांधना पूजा की उस शांति और पवित्रता में बाधा उत्पन्न कर सकता है, जो पितरों की आत्मा की तृप्ति के लिए बेहद जरूरी होती है। पितरों को दिखावा नहीं, बल्कि निश्छल श्रद्धा प्रिय है।
मांगलिक कार्यों और संकल्प की मनाही
सनातन धर्म के अनुसार पितृ पक्ष के दौरान किसी भी प्रकार के नए या 'मांगलिक' कार्य वर्जित माने गए हैं। रक्षा सूत्र (कलावा) हमेशा किसी नए संकल्प, यज्ञ, या शुभ कार्य की शुरुआत और पूर्णता पर बांधा जाता है। इसलिए, तर्पण और पिंडदान जैसे विशुद्ध रूप से पितृ-कर्मों में इसे शामिल नहीं किया जाता। इन दिनों में व्यक्ति को स्वयं की रक्षा और लाभ के लिए अनुष्ठान करने के बजाय, अपना पूरा ध्यान पितरों की शांति और मोक्ष पर केंद्रित करना चाहिए।
Frequently asked questions
क्या पितृ पक्ष में पहले से बंधा कलावा उतार सकते हैं?
हां, अगर आपका कलावा पुराना हो गया है या टूट रहा है, तो उसे सम्मानपूर्वक उतारकर किसी पेड़ के पास या जल में विसर्जित कर सकते हैं। लेकिन पितृ पक्ष समाप्त होने तक नया कलावा नहीं बांधना चाहिए।
क्या पितृ पक्ष में काला धागा बांध सकते हैं?
काला धागा आमतौर पर बुरी नजर से बचने के लिए पहना जाता है और यह मौली से अलग होता है। फिर भी, श्राद्ध के दौरान किसी भी प्रकार का नया धागा धारण करने से बचना चाहिए ताकि पूजा की पूर्ण सादगी बनी रहे।
