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श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी: संपूर्ण बोल, अर्थ और भक्ति भजन

प्रसिद्ध भजन 'श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी' के संपूर्ण बोल हिंदी और अंग्रेज़ी लिप्यंतरण में पढ़ें। साथ ही जानें भजन का भावार्थ, महत्व और भगवान कृष्ण के दिव्य नामों का अर्थ।

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पारंपरिक

Writer & Research Team

Updated: 2023-10-25
बांसुरी बजाते हुए भगवान श्री कृष्ण
कृष्ण

भजन 'श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी' भगवान श्री कृष्ण को समर्पित एक भावपूर्ण भक्ति भजन है। इसमें गोविंद, मुरारी, नारायण और वासुदेव जैसे उनके पवित्र नामों का स्मरण करते हुए भगवान के प्रति प्रेम, विश्वास और पूर्ण समर्पण की भावना व्यक्त की गई है।

Sacred Heritage

Timeless Temple Tradition

Architectural Wonder

Ancient Vedic Mastery

Scriptural Origin

Puranic & Epic History

Spiritual Sadhana

Living Faith & Wisdom

श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी भजन के संपूर्ण बोल

श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेवा ॥ हे नाथ नारायण...॥ पितु मात स्वामी, सखा हमारे हे नाथ नारायण वासुदेवा ॥ हे नाथ नारायण...॥ ॥ श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी...॥ बंदी गृह के, तुम अवतारी कही जन्मे, कही पले मुरारी किसी के जाये, किसी के कहाये है अद्भुद, हर बात तिहारी ॥ है अद्भुद, हर बात तिहारी ॥ गोकुल में चमके, मथुरा के तारे हे नाथ नारायण वासुदेवा ॥ श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेवा ॥ पितु मात स्वामी, सखा हमारे हे नाथ नारायण वासुदेवा ॥ अधर पे बंशी, ह्रदय में राधे बट गए दोनों में, आधे आधे हे राधा नागर, हे भक्त वत्सल सदैव भक्तों के, काम साधे ॥ सदैव भक्तों के, काम साधे ॥ वही गए वही, गए वही गए जहाँ गए पुकारे हे नाथ नारायण वासुदेवा॥ श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेवा ॥ पितु मात स्वामी सखा हमारे हे नाथ नारायण वासुदेवा ॥ गीता में उपदेश सुनाया धर्म युद्ध को धर्म बताया कर्म तू कर मत रख फल की इच्छा यह सन्देश तुम्ही से पाया अमर है गीता के बोल सारे हे नाथ नारायण वासुदेवा ॥ श्री कृष्णा गोविन्द हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेवा ॥ पितु मात स्वामी सखा हमारे हे नाथ नारायण वासुदेवा ॥

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प्रसिद्ध भजन 'श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी' के संपूर्ण बोल हिंदी और अंग्रेज़ी लिप्यंतरण में पढ़ें। साथ ही जानें भजन का भावार्थ, महत्व और भगवान कृष्ण के दिव्य नामों का अर्थ।

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Frequently asked questions

श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी भजन का मुख्य विषय क्या है?

इस भजन में भगवान श्री कृष्ण के प्रति गहरी भक्ति और समर्पण की भावना व्यक्त की गई है। इसमें गोविंद, मुरारी, नारायण और वासुदेव जैसे उनके पवित्र नामों का स्मरण किया गया है।

भजन में 'मुरारी' किसे कहा गया है?

'मुरारी' भगवान श्री कृष्ण का एक प्रसिद्ध नाम है। यह नाम मुरा नामक असुर पर भगवान की विजय से जुड़ा है और बुराई पर धर्म की विजय का प्रतीक माना जाता है।

'हे नाथ नारायण वासुदेवा' का क्या अर्थ है?

'हे नाथ' का अर्थ है 'हे प्रभु', 'नारायण' सर्वोच्च दिव्य सत्ता के लिए प्रयोग किया जाता है और 'वासुदेवा' भगवान कृष्ण के पिता वसुदेव से संबंधित नाम है। यह पंक्ति भगवान के प्रति भावपूर्ण पुकार और प्रार्थना को दर्शाती है।

'श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी' का क्या अर्थ है?

इस पंक्ति में भगवान कृष्ण के विभिन्न पवित्र नामों का स्मरण किया गया है। गोविंद भगवान कृष्ण का एक प्रसिद्ध नाम है, जबकि मुरारी उस प्रभु को कहा जाता है जिन्होंने मुरा नामक असुर का वध किया।

इस भजन को कब गाया या जपा जा सकता है?

इस भजन को सुबह की पूजा, शाम की आरती, सत्संग, कीर्तन, जन्माष्टमी जैसे अवसरों या भगवान कृष्ण के स्मरण के किसी भी समय गाया जा सकता है।

मुझे इस भजन के पूरे बोल कहाँ मिल सकते हैं?

इस पेज पर भजन के संपूर्ण बोल हिंदी में दिए गए हैं। साथ ही अंग्रेज़ी लिप्यंतरण भी दिया गया है, जिससे रोमन लिपि में पढ़ने वाले भक्त आसानी से इसका उच्चारण कर सकें।